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प्रसवोत्तर अवसाद (Postpartum Depression – PPD)

प्रसवोत्तर अवसाद (Postpartum Depression – PPD) – पूरी जानकारी हिंदी में

**मेटा डिस्क्रिप्शन:** प्रसव के बाद उदासी, रोना, चिड़चिड़ापन या बच्चे से लगाव न बनना? जानिए प्रसवोत्तर अवसाद के लक्षण, कारण, कितने दिन तक रहता है, खतरे के संकेत, इलाज और घरेलू-प्राकृतिक उपाय। माँएँ अकेली नहीं हैं।

मुख्य कीवर्ड: प्रसवोत्तर अवसाद, postpartum depression in hindi  

हर 7-8 में से 1 भारतीय माँ प्रसव के बाद गहरे अवसाद से गुजरती है।  

इसे “बेबी ब्लूज़” समझकर नजरअंदाज न करें।  

यह एक गंभीर लेकिन पूरी तरह ठीक होने वाला मानसिक स्वास्थ्य विकार है।

प्रसव के बाद होने वाला गंभीर और लम्बा चलने वाला डिप्रेशन ही **प्रसवोत्तर अवसाद (PPD)** कहलाता है।  

यह डिलीवरी के 2 सप्ताह से 1 साल के अंदर कभी भी शुरू हो सकता है।  

सबसे ज्यादा मामले पहले 3 महीने में आते हैं।

### तीन अलग-अलग स्थितियाँ होती हैं (इनमें फर्क समझना जरूरी है)

| स्थिति                  | कितने प्रतिशत माँओं को | कितने दिन तक रहता है     | गंभीरता       |

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| बेबी ब्लूज़ (Baby Blues) | 70-80%                | 3 से 10 दिन (अधिकतम 2 सप्ताह) | हल्का, अपने आप ठीक |

| प्रसवोत्तर अवसाद (PPD)   | 13-20%                | हफ्तों से महीनों तक       | गंभीर, इलाज जरूरी |

| प्रसवोत्तर साइकोसिस      | 0.1-0.2% (बहुत कम)     | अचानक शुरू, तुरंत इलाज   | आपातकालीन      |

प्रसवोत्तर अवसाद के लक्षण (10 में से 5 से ज्यादा हों तो तुरंत डॉक्टर से मिलें)

– हर समय बहुत उदासी या खालीपन महसूस होना  

– बिना वजह बार-बार रोना  

– बच्चे के प्रति प्यार या लगाव न बनना (“मैं बुरी माँ हूँ” का विचार)  

– बहुत चिड़चिड़ापन या गुस्सा आना  

– नींद न आना या बहुत ज्यादा सोना  

– भूख कम लगना या बहुत ज्यादा खाना  

– ऊर्जा बिल्कुल खत्म रहना  

– खुद को या बच्चे को नुकसान पहुँचाने के विचार आना (यह सबसे गंभीर लक्षण है)  

– एकाग्रता न बनना, फैसले न ले पाना  

– मौत या आत्महत्या के विचार

कारण – ऐसा क्यों होता है?

1. हॉर्मोन का अचानक बदलाव – एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन 200-300 गुना गिर जाते हैं  

2. थायरॉइड हॉर्मोन में गड़बड़ी (25% PPD माँओं में होती है)  

3. नींद की भयंकर कमी  

4. पहले से डिप्रेशन या चिंता का इतिहास  

5. अकेलापन, पति या परिवार का सहयोग न मिलना  

6. आर्थिक तनाव, अनचाहा गर्भ, समय से पहले डिलीवरी  

7. स्तनपान में दिक्कत

खतरे के संकेत – तुरंत अस्पताल जाएँ

– बच्चे को या खुद को नुकसान पहुँचाने के विचार  

– भ्रम होना, आवाजें सुनाई देना (साइकोसिस के लक्षण)  

– 2 सप्ताह बाद भी बेबी ब्लूज़ ठीक न हो  

– खाना-पीना पूरी तरह बंद हो जाए

इलाज – प्रसवोत्तर अवसाद पूरी तरह ठीक हो सकता है

1. एलोपैथिक इलाज (सबसे तेज और प्रभावी)

– एंटी-डिप्रेसेंट दवाएँ (स्तनपान कराते समय भी सुरक्षित दवाएँ उपलब्ध हैं – जैसे Sertraline, Escitalopram)  

– मनोचिकित्सक से बातचीत थेरेपी (CBT)  

– गंभीर मामलों में हॉस्पिटल में भर्ती

2. प्राकृतिक और सहायक उपाय

– रोज 30 मिनट धूप लेना  

– रोज हल्की वॉक या योग (प्राणायाम बहुत फायदा करता है)  

– ओमेगा-3 (अखरोट, अलसी, मछली या सप्लीमेंट)  

– परिवार से खुलकर बात करना, मदद माँगना  

– रोज 7-8 घंटे नींद के लिए रात में पति या माँ बच्चे को बोतल से दूध पिलाएँ  

– कैफीन और चीनी कम करें

3. होम्योपैथी में प्रसिद्ध दवाएँ (डॉक्टर की सलाह से)

– Sepia 200 – सबसे ज्यादा काम आती है (उदासी, बच्चे से चिढ़, थकान)  

– Natrum Mur 200 – अंदर से रोना, अकेले में रोना  

– Ignatia Amara 200 – भावुकता, सिसकियाँ लेना  

– Pulsatilla 200 – रुआंसा मिजाज, सहारे की जरूरत  

– Kali Phos 6X – तनाव, नींद न आना

4. आयुर्वेदिक उपाय

– ब्राह्मी, अश्वगंधा, जटामांसी, शंखपुष्पी  

– शिरोधारा थेरेपी बहुत लाभकारी  

– रोज गाय के घी में शतावरी कल्प मिलाकर दूध पीना  

– मेद्या रसायन 3-6 महीने लेने से स्थायी लाभ

5. बायोकेमिक टिश्यू साल्ट्स

– Kali Phos 6X – नर्वस ब्रेकडाउन की नंबर-1 दवा (दिन में 4 बार 4 गोलियाँ)  

– Natrum Mur 6X – उदासी और अकेलापन  

– Natrum Sulph 6X – सुबह उदासी ज्यादा हो तो

परिवार और पति क्या कर सकते हैं?

– माँ को रोज 2-3 घंटे अकेले सोने का समय दें  

– घर के सारे काम खुद करें  

– तारीफ करें, प्यार दिखाएँ  

– “ऐसा कुछ नहीं है, हिम्मत रखो” न बोलें – यह और बुरा करता है  

– बस साथ बैठें, सुनें, गले लगाएँ

अंतिम बात

प्रसवोत्तर अवसाद आपकी गलती नहीं है।  

यह हॉर्मोन और परिस्थितियों का मिला-जुला असर है।  

85-90% माँएँ सही इलाज से 3-6 महीने में पूरी तरह ठीक हो जाती हैं।  

आप अकेली नहीं हैं।  

मदद माँगना कमजोरी नहीं, सबसे बड़ी हिम्मत है।

हेल्पलाइन नंबर (24×7 मानसिक स्वास्थ्य सहायता)  

– वंद्रेवाला फाउंडेशन: 9999666555  

– iCall (TISS): 9152987821  

– NIMHANS हेल्पलाइन: 080-46110007

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